Heart thrilling love story दिल को स्पर्श करने वाली संगीतमय कहानी

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नमस्कार दोस्तों मैं आज आपके लिए एक ऐसी कहानी लेकर आया हूं जो आपके दिल को

झकझोर कर रख देगी।यह वास्तव मे एक Heart touching, thrilling and sensational love story है।यदि यह story अच्छी  लगे तो like, share and comment अवश्य करें।
तो आइए शुरू करते हैं
Heart thrilling love story की शुरुआत होती है एक कॉलेज से । BNMU के एक कोलेज में दोनों BSc part 1 में पढ़ते थे।दोनो साथ-साथ कॉलेज जााते  थे ।धीरे धीरे लड़की लड़के को मन ही मन  चाहने  लगी।लड़का इस चक्कर मे नही पड़ना चाहता था इसलिए जब उसे इस बात का पता चला तो उसने लड़की को समझाया और कहा:-
चाहती हो दूर से तो कोई बात नहीं,
पर मत चाहना कभी अपना बनके।
चाहत पे कोई रोक नहीं मगर
दिल मे उतरने की कोशिश भी मत करना,
क्योंकि मेरे प्यार का सागर है इतना गहरा की,
एक बार डूब गई तो, बाहर निकलने की चाहत,
रह जाएगी बस सपना बनके।
     प्यार तो होना ही था सो हो गया लेकिन बीच बीच मे दोनो के साथ कुछ ऐसी बातें होने लगी जिससे लड़के को लगने लगा कि शायद उसके प्यार का इम्तिहान लिया जा रहा है।तब एक बार फिर लड़की से कहा:-
प्यार करती हो तो सौक से करो,
पर कभी भी इसका इम्तिहान मत लेना,
क्योंकि प्यार कोई परीक्षा नहीं,
जिसमे पास और फेल है,
यह तो वह संगम है जो,
बस दो दिलों का मेल है।
परंतु हुआ वही जिसकी संभावना  बन रही थी।वह इस छोड़ दूसरे के प्यार में पर गई।उसके दोस्त पूछने लगे अरे यार क्या हुआ? तुम्हे तो वह अपना मानती थी और तुम भी उसके सपने देखा  करते थे तो वो अपने दोस्तों से कहते थे:-
सपनों की बाते अपनो से क्या कहें,
अपने तो अब खुद सपना होने लगे।
मेरे दीदार को तरसती थी जो आँखे,
वो तो अब किसी और के सपनों में खोने लगे।

वह इन चक्करों से बाहर निकल कर अपनी पढ़ाई में ध्यान देने लगा और दोस्तों के पूछने पर कहने लगा:-
अच्छा किया जो उसने मुझे भुला दिया वरना,
इल्जाम मुझपर आता कि मैंने उसे रुला दिया।
फिर क्या था समय गुजरता गया और दोनों अपने अपने राह पर आगे बढ़ता गया।उस लड़के ने कड़ी मेहनत की परिणाम स्वरूप एक बड़ा पद प्राप्त कर मजे से अपना जीवन व्यतीत करने लगा।फिर एक दिन उसे पता चला कि उस लड़की ने जिससे प्यार किया था वह गलत आदतों से ग्रसित था। उसने उस लड़की का जीवन नरक बना दिया था।संयोगवश एक दिन उसकी मुलाकात उसी लड़की से हो गई तो वह बोल पड़ा:-
मुझे तो मिल गई मंजिल,
 जब निकला उस दलदल से,
रहता हूँ खुश, मजे उठाता हु जिंदगी का,
जी भर के।
पर तुम फँस जिस जिस दलदल में,
यदि उससे अभी न भी निकल पाओ तो,
कोई बात नहीं, जबतक रहना उसमे,
रहना कमल बनके।
कौन कहता है कि मैं तेरी राहों में खड़ा था,
तुमने कैसे मान लिया कि मैं तेरे पीछे पड़ा था,
मेरा इरादा तो कुछ और था ,
जो तुम समझ न पायी।
मुझे अनसुना कर ,
उस दलदल में जा समायी।
       अब भी समय है कोशिश तो करो,
       न भी निकल पाओ तो गम न करना,
       मैं हूं न , निकल दूँगा तुम्हे उस दलदल से,
       अपना बनके।
फिर क्या था लड़की उससे लिपट गयी और फूट-फुट कर रोते बिलखते हुए कहने लगी:-
माफ़ कर दो मुझे मैं तुम्हें समझ न पाई,
अपनो को पराया समझा और,
पराये में देखी अपनों की परछाई।
          हाँ वो परछाई ही थी,
          जिसने अंधेरा होते ही,
          मेरा साथ छोड़ दिया,
          मेरे जीवन की राह को,
          बदनामियों के दलदल 
          की तरफ मोड़ दिया।
अब तो बस तुम्हारा ही सहारा है,
बस जाओ मेरे दिल मे फिर से,
अपना बनके।
इस तरह दोनो फिर से एक बार मिल गए।और पूरा करने में जुट गए जो देखा था उन दोनों ने मिलकर सपना।
दोस्तों यहाँ मेरी कहानी समाप्त होती है कॉमेंट अवश्य करे की कैसी लगी।इस कहानी को पढ़ने के बाद आँखों में आंसू आ जाएंगी
          मेरे blog पर आने के लिये 
                       धन्यवाद
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